उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo matlab ki nahin wo shai luTera chhoD jata hai

जो मतलब की नहीं वो शय लुटेरा छोड़ जाता है

جو مطلب کی نہیں وہ شے لٹیرا چھوڑ جاتا ہے

शायर: Vaqar Faruqi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो मतलब की नहीं वो शय लुटेरा छोड़ जाता है
अपाहिज बाप हो जाए तो बेटा छोड़ जाता है

अब ऐसे शह-जहाँ तो हम नहीं जो ताज बनवाएँ
हमारे ख़्वाब में ये कौन नक़्शा छोड़ जाता है

कोई इंसान से बढ़ कर नहीं ज़ालिम ज़माने में
दरिंदा भी उसे देखे तो रस्ता छोड़ जाता है

कहीं दंगे भड़कते हैं कहीं होता है हंगामा
वो आता है तो इक शोशा हमेशा छोड़ जाता है

तबाही बाद में आती है जाता है 'वक़ार' अव्वल
हमेशा शाम से पहले ही साया छोड़ जाता है