उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kisi parde mein koi jalwa-gar hoga to kya hoga

किसी पर्दे में कोई जल्वा-गर होगा तो क्या होगा

کسی پردے میں کوئی جلوہ گر ہوگا تو کیا ہوگا

शायर: Raft Bahraichi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किसी पर्दे में कोई जल्वा-गर होगा तो क्या होगा
तहय्युर में जो ग़म ज़ौक़-ए-नज़र होगा तो क्या होगा

मोहब्बत का अगर उल्टा असर होगा तो क्या होगा
निज़ाम-ए-ज़िंदगी ज़ेर-ओ-ज़बर होगा तो क्या होगा

दलील-ए-'आम जब है ज़िंदगी में इंक़लाब आना
तू ही हमदम अगर बेदाद-गर होगा तो क्या होगा

पता देती है हर मंज़िल पे ख़ुद ही अपनी मंज़िल का
मोहब्बत में न कोई राहबर होगा तो गया होगा

मज़ाक़-ए-ज़ौक़-ए-सज्दा ना-मुकम्मल रह नहीं सकता
अगर मा'दूम उन का संग-ए-दर होगा तो क्या होगा

मुसलसल बढ़ती जाती है मोहब्बत की तपिश दिल में
बता देना ज़रा ऐ चश्म-ए-तर होगा तो क्या होगा

मोहब्बत जबकि फ़ितरत है तो ग़म किस बात का 'राफ़त'
बला से दर्द-ए-दिल दर्द-ए-जिगर होगा तो क्या होगा