उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kisi mahal mein na shahon ki aan-ban mein hai

किसी महल में न शाहों की आन-बान में है

کسی محل میں نہ شاہوں کی آن بان میں ہے

शायर: Naeem Zarrar Ahmad4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किसी महल में न शाहों की आन-बान में है
सुकून जो किसी ढाबे के साएबान में है

मैं उस मक़ाम पे हूँ जैसे कोई ख़ाली हाथ
निगाह-ए-हसरत-ओ-अरमाँ लिए दुकान में है

दरिंदे शहर में आबाद हो गए सारे
सुना है साथ का जंगल बड़ी अमान में है

ये जानता है पलट कर उसे नहीं आना
वो अपनी ज़ीस्त की खिंचती हुई कमान में है