उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bikhra hai kai bar sameTa hai kai bar

बिखरा है कई बार समेटा है कई बार

بکھرا ہے کئی بار سمیٹا ہے کئی بار

शायर: Naeem Zarrar Ahmad4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बिखरा है कई बार समेटा है कई बार
ये दिल तिरे अतराफ़ को निकला है कई बार

जिस चाँद के दीदार की हसरत में है दुनिया
वो शाम ढले घर मिरे उतरा है कई बार

सुन कर तुझे मदहोश ज़माना है मुझे देख
जिस ने तिरी आवाज़ को देखा है कई बार

अफ़्सोस कि है इश्क़-ए-यगाना से बहुत दूर
यारो तुम्हें हर रोज़ जो होता है कई बार