उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kis ka darwaza khaTkhaTati hai

किस का दरवाज़ा खटखटाती है

کس کا دروازہ کھٹکھٹاتی ہے

शायर: Nadiya ambar lodhi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किस का दरवाज़ा खटखटाती है
दूर तक ख़्वाहिश उड़ती जाती है

दिल वो मेरा अजब बहानों से
तोड़ती है कभी बनाती है

जूँ ही होती हूँ गुम कहानी में
तिरी तस्वीर ढूँड लाती है

दस मोहर्रम को प्यास कर्बल की
मुझ को हर बार ही रुलाती है

अपनी ज़र-ख़ेज़ियाँ बढ़ाने को
गीली मिट्टी मुझे बुलाती है

इश्क़ 'अम्बर' वो बे-क़रारी है
लगती है और बढ़ती जाती है