उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum ko aaghaz-e-safar marta hai

हम को आग़ाज़-ए-सफ़र मारता है

ہم کو آغاز سفر مارتا ہے

शायर: Nadiya ambar lodhi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम को आग़ाज़-ए-सफ़र मारता है
मारता कोई नहीं डर मारता है

ज़िंदगी है मिरी मुश्किल में पड़ी
इश्क़ है कि बे-ख़बर मारता है

तिरी मुझ से नहीं क़ुर्बत न सही
मुझ को तो हुस्न-ए-नज़र मारता है

ज़िंदगी उस की है मुहताज मगर
दे भी सकता है मगर मारता है

इक हँसी गूँजी थी घर में मेरे
मुझ को यादों का असर मारता है