उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ki mohabbat bhi to murawwat mein

की मोहब्बत भी तो मुरव्वत में

کی محبت بھی تو مروت میں

शायर: Osama Haroon8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

की मोहब्बत भी तो मुरव्वत में
ये ख़बासत थी अपनी ख़सलत में

कैसे मुमकिन है दिल को भाए बस
एक ही शख़्स इतनी ख़िल्क़त में

मैं कहूँ तू मिरा मकान न ले
दम घुटेगा यहाँ की वहशत में

उस की महफ़िल में दिल पड़ा होगा
आ गया था मैं उठ के 'उजलत में

याद करता हूँ तुझ को फ़ुर्सत से
काम करता हूँ बाक़ी फ़ुर्सत में

ग़म का मूजिब नहीं है कोई भी
ये तो दाख़िल है अपनी फ़ितरत में

अपना होना तो इक शरारत है
कौन शामिल था इस शरारत में

'इश्क़ का कारोबार कौन करे
बस ख़सारा है इस तिजारत में