उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil-shikasta-o-paemal rahe

दिल-शिकस्ता-ओ-पाएमाल रहे

دل شکستہ و پائمال رہے

शायर: Osama Haroon5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल-शिकस्ता-ओ-पाएमाल रहे
हम तिरे हिज्र में निढाल रहे

अपने दो चार दिन ज़मीन पे थे
जिन में दो-चार सौ वबाल रहे

ज़िंदगी की रही वही तल्ख़ी
हम उसी तरह ख़ुश-ख़िसाल रहे

हम हैं साज़ों पे टूटती साँसें
जिन से नय सुर बचे न ताल रहे

एक लम्हे में हम ने 'इश्क़ चुना
और ता-'उम्र पुर-मलाल रहे