उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har nae aadmi se Darta hai

हर नए आदमी से डरता है

ہر نئے آدمی سے ڈرتا ہے

शायर: Osama Haroon4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर नए आदमी से डरता है
दिल अभी दिल-लगी से डरता है

दिल की बेचारगी का 'आलम देख
तेरा हो के तुझी से डरता है

तेरी हर अन-सुनी से डरता है
अपनी हर अन-कही से डरता है

'इश्क़ से आश्ना तो है पर दिल
'इश्क़ की आगही से डरता है