उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHwabon ki tabiren bhi hon

ख़्वाबों की ता'बीरें भी हों

خوابوں کی تعبیریں بھی ہوں

शायर: Vigyan Vrat5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़्वाबों की ता'बीरें भी हों
यादों की तस्वीरें भी हों

अपने उनवानों जैसी ही
काश कि कुछ तहरीरें भी हों

लाख तरीक़े मर जाने के
जीने की तदबीरें भी हों

सिर्फ़ लकीरों से क्या होगा
हाथों में तक़दीरें भी हों

सिर्फ़ उठें जो हक़ की ख़ातिर
कुछ ऐसी शमशीरें भी हों