उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jitne log shahar mein hain

जितने लोग शहर में हैं

جتنے لوگ شہر میں ہیں

शायर: Vigyan Vrat5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जितने लोग शहर में हैं
एक मुसलसल डर में हैं

मंज़िल पीछे छूट गई
फिर भी लोग सफ़र में हैं

सिर्फ़ मिरे क़दमों के निशाँ
मेरी राहगुज़र में हैं

उन से उत्तर क्या पूछा
प्रश्न कई उत्तर में हैं

ख़ैर तो है 'विज्ञान' मियाँ
काफ़ी दिन से घर में हैं