उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHwab sa tha KHayal aaKHir-e-shab

ख़्वाब सा था ख़याल आख़िर-ए-शब

خواب سا تھا خیال آخر شب

शायर: Tahir Azeem6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़्वाब सा था ख़याल आख़िर-ए-शब
रह गया इक मलाल आख़िर-ए-शब

जाम भर कर वो आधी रात का चाँद
डालता है धमाल आख़िर-ए-शब

उड़ती फिरती है ज़ुल्फ़ की ख़ुशबू
खोलता है वो बाल आख़िर-ए-शब

एक ही बात है हमारे लिए
शाम-ए-ग़म या विसाल आख़िर-ए-शब

देखिए ख़्वाब कब मुकम्मल हो
आज फिर ये सवाल आख़िर-ए-शब

इक सितारे पे आ गया है 'अज़ीम'
चाँद जैसा जमाल आख़िर-ए-शब