उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHwab aankhon se zaban se har kahani le gaya

ख़्वाब आँखों से ज़बाँ से हर कहानी ले गया

خواب آنکھوں سے زباں سے ہر کہانی لے گیا

शायर: Iffat Zarrin5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़्वाब आँखों से ज़बाँ से हर कहानी ले गया
मुख़्तसर ये है वो मेरी ज़िंदगानी ले गया

फूल से मौसम की बरसातें हवाओं की महक
अब के मौसम की वो सब शामें सुहानी ले गया

दे गया मुझ को सराबों का सुकूत-ए-मुस्तक़िल
मेरे अश्कों से वो दरिया की रवानी ले गया

ख़ाक अब उड़ने लगी मैदान सहरा हो गए
रेत का तूफ़ान दरियाओं से पानी ले गया

कौन पहचानेगा 'ज़र्रीं' मुझ को इतनी भीड़ में
मेरे चेहरे से वो अपनी हर निशानी ले गया