उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHwab aankhon mein sajae rakhna

ख़्वाब आँखों में सजाए रखना

خواب آنکھوں میں سجائے رکھنا

शायर: Ummeed Fazli6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़्वाब आँखों में सजाए रखना
'अज़्म के दीप जलाए रखना

दाव चल जाए न शब-ज़ादों का
लौ चराग़ों की बढ़ाए रखना

मेहरबाँ माँ की तरह है ये ज़मीं
सर यहाँ अपना झुकाए रखना

चाँद उतरे न ज़मीं पे जब तक
आसमाँ सर पे उठाए रखना

ज़िंदा रहना है तो यारान-ए-'अज़ीज़
हाथ से हाथ मिलाए रखना

जिस ने ये रूप दिया है 'उम्मीद'
वो ज़मीं दिल में बसाए रखना