उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHuda bachae mohabbat ki us bala se bhi

ख़ुदा बचाए मोहब्बत की उस बला से भी

خدا بچائے محبت کی اس بلا سے بھی

शायर: Parveen Kaif8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ुदा बचाए मोहब्बत की उस बला से भी
कि दर्द-ए-दिल नहीं जाता किसी दवा से भी

जला रखे हैं मिरी ज़िंदगी में साँसों ने
चराग़ ऐसे कि बुझते नहीं हवा से भी

मिरे लिए मिरा अल्लाह कौन सा कम है
मुझे तो काम नहीं है किसी ख़ुदा से भी

चराग़-ए-राह बनाया है तुम ने किस किस को
कभी मिले हो मोहम्मद के नक़्श-ए-पा से भी

हम अपनी जान उसी पर निसार करते हैं
हमें वो क़त्ल करे चाहे जिस अदा से भी

इसी चमन में जो मेरा चमन है मेरा चमन
बहुत से पेड़ मिरे ख़ून के हैं प्यासे भी

सितम किसी पे वो करते नहीं हमारे सिवा
जफ़ा तो है ये मगर कम नहीं वफ़ा से भी

धड़कते शेर सुने हम ने बिन्त-ए-'कैफ़' से आज
मिले हम एक मोहब्बत की शाएरा से भी