उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHabar ye kahan thi ki yun haar hogi

ख़बर ये कहाँ थी कि यूँ हार होगी

خبر یہ کہاں تھی کہ یوں ہار ہوگی

शायर: Ehtisham Akhtar8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़बर ये कहाँ थी कि यूँ हार होगी
कि दस्त-ए-हिनाई में तलवार होगी

गुज़र जाएँगे वो तो आसाँ समझ कर
हमारे लिए राह दुश्वार होगी

जिसे तुम समझते हो अनमोल कल तक
मोहब्बत की वो जिंस-ए-बेकार होगी

सुना है कि आएगा वो पास मेरे
मगर दरमियाँ एक दीवार होगी

मिलन के लिए तुम तड़पते हो जिन के
कभी उन की फ़ुर्क़त भी दरकार होगी

किनारे पे आ कर सुकूँ मिल गया अब
बहुत फ़िक्र थी नाव कब पार होगी

वो गठरी हवस की लिए जा रहा है
मुसाफ़िर पे जंगल में यलग़ार होगी

बहुत ख़ुश्क है ये ज़मीन-ए-मोहब्बत
जो बरसेंगी आँखें तो गुलज़ार होगी