उर्दू शायरी · ग़ज़ल

charagh dil ka tha raushan bujha gaya pani

चराग़ दिल का था रौशन बुझा गया पानी

چراغ دل کا تھا روشن بجھا گیا پانی

शायर: Ehtisham Akhtar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चराग़ दिल का था रौशन बुझा गया पानी
कि बन के सैल-ए-बला घर में आ गया पानी

ख़ुलूस प्यार वफ़ा सब उसी के साथ गए
मोहब्बतों के निशाँ सब मिटा गया पानी

चढ़ा हुआ था जो दरिया उतर गया लेकिन
हमारी ऊँची इमारत ढहा गया पानी

बुझेगी प्यास भला क्या ज़मीं की अश्कों से
हमारी आँख में क्यूँ आज आ गया पानी

हुई जो बारिश-ए-ग़म तो बदल गए मंज़र
ज़रा सी देर में क्या क्या दिखा गया पानी

डुबो ही देगा तुम्हें अब नदी का ये सैलाब
कहाँ बचोगे कि अब घर में आ गया पानी

मैं अब ये शहर-ए-हवस छोड़ कर कहाँ जाऊँ
मुझे तो रास यहाँ का अब आ गया पानी