उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kaunsi chiz hai jo puri hai

कौनसी चीज़ है जो पूरी है

کونسی چیز ہے جو پوری ہے

शायर: Zafar Naseemi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कौनसी चीज़ है जो पूरी है
ज़िंदगी आज भी अधूरी है

नेकियाँ कर के सोचना कैसा
कोई बदला मिले ज़रूरी है

कामयाबी का राज़ बतलाऊँ
अव्वलीं शर्त जी-हुज़ूरी है

हम ने काटे हैं दिन क़यामत के
ग़म की ये रात भी उबूरी है

वही बे-इल्तिफ़ाती-ए-जानाँ
वही ईज़ा-ए-ना-सुबूरी है

ख़ाक हूँ फिर भी शर्मसार नहीं
एक गोशा तो दिल का नूरी है

दिल को अक्सर कचोकता है 'ज़फ़र'
कोई एहसास-ए-ला-शुऊरी है