उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kaT gae hum to habibon se ijazat le kar

कट गए हम तो हबीबों से इजाज़त ले कर

کٹ گئے ہم تو حبیبوں سے اجازت لے کر

शायर: R P Shokh5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कट गए हम तो हबीबों से इजाज़त ले कर
हम से मिलता है रक़ीबों से इजाज़त ले कर

नहीं चारा तो है तहज़ीब इसी में ऐ जाँ
आज मर जाएँ तबीबों से इजाज़त ले कर

हम तो मरते रहे शमशाद क़दों पर अक्सर
क्या जिएँ आज सलीबों से इजाज़त ले कर

तुम ने पूछा तो इनायत है तुम्हारी वर्ना
कौन जाता है ग़रीबों से इजाज़त ले कर

ज़िंदगी क्यूँ है तू अब मिल के पशेमाँ हम से
तुम को आना था नसीबों से इजाज़त ले कर