उर्दू शायरी · ग़ज़ल

karte hain etiraaz ki hum bolte nahin

करते हैं ए'तिराज़ कि हम बोलते नहीं

کرتے ہیں اعتراض کہ ہم بولتے نہیں

शायर: Raakesh ulfat5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

करते हैं ए'तिराज़ कि हम बोलते नहीं
हम बोलने लगें तो सनम बोलते नहीं

ख़ामोश रहना चाहें तो रहते हैं देर तक
जब बोलने पे आएँ तो कम बोलते नहीं

बचने का सिर्फ़ एक तरीक़ा है एहतियात
चोरों के चलते वक़्त क़दम बोलते नहीं

दिल पर किसी के अपनी समाअ'त को रख के सुन
किस ने कहा है ये कि सितम बोलते नहीं

अश्कों का रूप ले के बताते हैं दिल की बात
'उल्फ़त' हमारे मुँह से तो ग़म बोलते नहीं