उर्दू शायरी · ग़ज़ल

karenge zulm duniya par ye but aur aasman kab tak

करेंगे ज़ुल्म दुनिया पर ये बुत और आसमाँ कब तक

کریں گے ظلم دنیا پر یہ بت اور آسماں کب تک

शायर: Parveen Umm-e-Mushtaq7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

करेंगे ज़ुल्म दुनिया पर ये बुत और आसमाँ कब तक
रहेगा पीर ये कब तक रहोगे तुम जवाँ कब तक

ख़ुदावंदा इन्हें किस दिन शु'ऊर आएगा दुनिया का
रहेंगी बे-पढ़ी-लिक्खी हमारी लड़कियाँ कब तक

फिरेगा और कितने दिन ख़याली पार घोड़े पर
उड़ेगा शे'र-गोई में न इंजन का धुआँ कब तक

इनान-ए-हुक्मरानी देखिए किस दिन ख़ुदा लेगा
रहेंगे क़िस्मतों पर हुक्मराँ ये आसमाँ कब तक

दिए जाएँगे कब तक शैख़-साहिब कुफ़्र के फ़तवे
रहेंगी उन के संदूक़ों में दीं की कुंजियाँ कब तक

चली जाएगी इक ही रुख़ हवा ताकि ज़माने की
न पूरा होगा तेरा दौर ये ऐ आसमाँ कब तक

तहम्मुल ख़त्म होते ही बड़ी बद-नामियाँ होंगी
तुम्हारे ख़ौफ़ से 'परवीं' न खोलेगी ज़बाँ कब तक