उर्दू शायरी · ग़ज़ल

karenge qasd hum jis dam tumhaare ghar mein aawenge

करेंगे क़स्द हम जिस दम तुम्हारे घर में आवेंगे

کریں گے قصد ہم جس دم تمہارے گھر میں آویں گے

शायर: Bahadur Shah Zafar8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

करेंगे क़स्द हम जिस दम तुम्हारे घर में आवेंगे
जो होगी उम्र भर की राह तो दम भर में आवेंगे

अगर हाथों से उस शीरीं-अदा के ज़ब्ह होंगे हम
तो शर्बत के से घूँट आब-ए-दम-ए-ख़ंजर में आवेंगे

यही गर जोश-ए-गिर्या है तो बह कर साथ अश्कों के
हज़ारों पारा-ए-दिल मेरे चश्म-ए-तर में आवेंगे

गर इस क़ैद-ए-बला से अब की छूटेंगे तो फिर हरगिज़
न हम दाम-ए-फ़रेब-ए-शोख़-ए-ग़ारत-गर में आवेंगे

न जाते गरचे मर जाते जो हम मालूम कर जाते
कि इतना तंग जा कर कूचा-ए-दिलबर में आवेंगे

गरेबाँ-चाक लाखों हाथ से उस मेहर-ए-तलअत के
ब-रंग-ए-सुब्ह-ए-महशर अरसा-ए-महशर में आवेंगे

जो सरगरदानी अपनी तेरे दीवाने दिखाएँगे
तो फिर क्या क्या बगूले दश्त के चक्कर में आवेंगे

'ज़फ़र' अपना करिश्मा गर दिखाया चश्म-ए-साक़ी ने
तमाशे जाम-ए-जम के सब नज़र साग़र में आवेंगे