उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kam-baKHt dil bura ho teri aah aah ka

कम-बख़्त दिल बुरा हो तिरी आह आह का

کمبخت دل برا ہو تری آہ آہ کا

शायर: Hafeez Jalandhari7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कम-बख़्त दिल बुरा हो तिरी आह आह का
हुस्न-ए-निगाह भी न रहा गाह गाह का

छेड़ो न मीठी नींद में ऐ मुनकर-ओ-नकीर
सोने दो भाई मैं थका-माँदा हूँ राह का

मेरे मुक़ल्लिदों को मिरी राह-ए-शौक़ में
हर गाम पर निशान मिला सज्दा-गाह का

दिल सा गवाह हश्र में आ कर फिसल गया
अब रहम पर मुआ'मला है दाद-ख़्वाह का

किस मुँह से कह रहे हो हमें कुछ ग़रज़ नहीं
किस मुँह से तुम ने वा'दा किया था निबाह का

दिल लेने वाली बात इसी दिल से पोछिए
मालिक यही है मेरे सफ़ेद ओ सियाह का

पेश-ए-ख़ुदा चलो तो मज़ा जब है ऐ 'हफ़ीज़'
नारा हो लब पे अशहदो-अन-ला-इलाह का