उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kai din se koi hichki nahin hai

कई दिन से कोई हिचकी नहीं है

کئی دن سے کوئی ہچکی نہیں ہے

शायर: Nadim Nadeem4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कई दिन से कोई हिचकी नहीं है
वो हम को याद अब करती नहीं है

सिवा तेरे जिधर से कोई आए
हमारे दिल में वो खिड़की नहीं है

मैं जिस दरिया में काँटा डालता था
सुना है अब वहाँ मछली नहीं है

थीं जितनी सब कुएँ में फेंक आए
हमारे पास अब नेकी नहीं है