उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kahun kis se ba-juz tere KHudaya aarzu dil ki

कहूँ किस से ब-जुज़ तेरे ख़ुदाया आरज़ू दिल की

کہوں کس سے بجز تیرے خدایا آرزو دل کی

शायर: Maharaja Sir Kishan Parashad Shad11 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कहूँ किस से ब-जुज़ तेरे ख़ुदाया आरज़ू दिल की
मुराद अपनी हमेशा तुझ से ही बस मैं ने हासिल की

सँभलना होता मुश्किल ग़ैर हालत होती क़ातिल की
बहुत अच्छा हुआ देखी तड़प उस ने न बिस्मिल की

तू ही मा'बूद है मेरा तू ही मतलूब है मेरा
यही मतलूब है मुझ को तमन्ना है यही दिल की

ग़रज़ तौफ़-ए-हरम से क्या हर इक ज़र्रे में है जल्वा
ज़रूरत कुछ नहीं सालिक को इस वीरान मंज़िल की

अगर चाहे कि औज-ए-बख़्त हासिल हो नसीहत सुन
वफ़ूर-ए-ख़ाकसारी से ये दौलत सब ने हासिल की

ग़ज़ब है इम्तिहाँ में मेरे आगे क़त्ल हो कोई
गले पर फेर लूँगा छीन कर तलवार क़ातिल की

ख़िज़ाँ में देख कर रंग-ए-चमन क्या रंज होता है
दुखा देती हैं दिल को हाए फ़रियादें अनादिल की

ज़रा ठहरो फ़रिश्तो कुछ तो याँ आराम लेने दो
उठा कर आ रहा हूँ सख़्तियाँ हस्ती की मंज़िल की

कभी बेचैन रहता है फड़कता है कभी बर में
बताऊँ क्या तुम्हें मैं कैसी हालत है मिरे दिल की

मकाँ में मेरे तुम आए बड़ी ये मेहरबानी की
यही ख़्वाहिश तमन्ना भी यही थी बस मिरे दिल की

जिसे सब 'शाद' कहते हैं तिरे दर का भिकारी है
करेगा तू ही या-रब पूरी हाजत अपने साइल की