उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kahiye ab kis se dard-e-pinhani

कहिए अब किस से दर्द-ए-पिन्हानी

کہیے اب کس سے درد پنہانی

शायर: Maharaja Sir Kishan Parashad Shad11 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कहिए अब किस से दर्द-ए-पिन्हानी
इक शब-ए-हिज्र वो भी तूलानी

एक बाक़ी रहेगी उस की ज़ात
सारा आलम है आनी-ओ-फ़ानी

जाम-ए-जमशेद बे-हक़ीक़त है
साक़िया दे शराब-ए-रैहानी

दिल में उस की न होगी क्यूँकर चाह
उस का जल्वा है हुस्न-ए-कनआनी

दिल के आईने में उसे देखा
बढ़ गई और मेरी हैरानी

वहदहू-ला-शरीक-लह के सिवा
सज्दा किस को करे ये पेशानी

वो निगहबान अपना है हर दम
ख़ूब उसे आती है निगहबानी

उस के दरबार में गुज़र क्या हो
ये फ़क़ीर और बज़्म-ए-सुल्तानी

आते आते ब-मुश्किल आती है
कोई आसाँ नहीं ज़बाँ-दानी

क्या करेगा इलाज इस का मसीह
क्या सुनाऊँ मैं दर्द-ए-पिन्हानी

वही मुश्किल करेगा आसाँ 'शाद'
शादमानी में है सब आसानी