उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kahani kuchh bhi nahin thi bayan ziyaada tha

कहानी कुछ भी नहीं थी बयाँ ज़ियादा था

کہانی کچھ بھی نہیں تھی بیاں زیادہ تھا

शायर: Obaidur Rahman5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कहानी कुछ भी नहीं थी बयाँ ज़ियादा था
ज़रा सी आग लगी थी धुआँ ज़ियादा था

वो कारवाँ में न था ऐसी कोई बात नहीं
बिछड़ गया था कि वो बद-गुमाँ ज़ियादा था

बस इस सबब से न रास आ सकी हमें ये ज़मीं
कि अपने ज़ेहन में ये आसमाँ ज़ियादा था

मैं उस के साथ सफ़र कर सका न दूर तलक
कि लफ़्ज़ लफ़्ज़ वो मुझ पर अयाँ ज़ियादा था

तो इस में क्या है तअ'ज्जुब हुए जो आप तबाह
'उबैद' आप पे वो मेहरबाँ ज़ियादा था