उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kah diya yun hi bewafa mujhko

कह दिया यूँ ही बेवफ़ा मुझ को

کہہ دیا یوں ہی بے وفا مجھ کو

शायर: Chitra Bhardwaj suman7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कह दिया यूँ ही बेवफ़ा मुझ को
बात आख़िर है क्या बता मुझ को

रौनक़ें गुम हैं मेरे चेहरे की
रोज़ कहता है आइना मुझ को

टूट कर शाख़ से बिखरना है
गर्म लगती है अब हवा मुझ को

चार दिन में ही थक गए थे क़दम
फिर मिला ग़म का आसरा मुझ को

दिल जो हारा तो फिर बचेगा क्या
ज़िंदगी अब न आज़मा मुझ को

ढंग का कुछ न वो बना पाया
उम्र भर चाक पर रखा मुझ को

हाथ में क़ैद है 'सुमन' क़िस्मत
रूठने तक गुमाँ रहा मुझ को