उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jism-o-jaan par kisi jogi ka main saya dekhun

जिस्म-ओ-जाँ पर किसी जोगी का मैं साया देखूँ

جسم و جاں پر کسی جوگی کا میں سایہ دیکھوں

शायर: Chitra Bhardwaj suman7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जिस्म-ओ-जाँ पर किसी जोगी का मैं साया देखूँ
इश्क़ की ताल पे जोगन का थिरकना देखूँ

अपने चेहरे पे तेरी आँखों का पहरा देखूँ
प्यास दरिया का समुंदर में समाना देखूँ

क़तरा क़तरा जो नशा इश्क़ का उतरा मुझ में
रफ़्ता रफ़्ता तिरी साँसों में उतरता देखूँ

पहले मिस्रा में तुझे बाँध लिया है मैं ने
दूसरे मिस्रा में अब ख़ुद का बसेरा देखूँ

अब्र बन बरसे मेरे खेत से गुज़रा है अभी
मौसम-ए-आब में फ़स्लों को झुलसता देखूँ

चश्म की झील में वो अक्स उतर जाए फिर
शब तो आधी हो मगर चाँद को पूरा देखूँ

आरज़ू में तिरी बल खाए चली जाऊँ 'सुमन'
जब किसी बेल को मैं पेड़ से लिपटा देखूँ