उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ab mariz-e-ishq ko kaisa Thikana chahiye

अब मरीज़-ए-इश्क़ को कैसा ठिकाना चाहिए

اب مریض عشق کو کیسا ٹھکانہ چاہیے

शायर: Chitra Bhardwaj suman5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अब मरीज़-ए-इश्क़ को कैसा ठिकाना चाहिए
आतिश-ए-दिल को हवा पर आशियाना चाहिए

लग गईं हैं दाव पर साँसें बिसात-ए-इश्क़ में
उस तरफ़ या इस तरफ़ तय हो ही जाना चाहिए

रूह को तेरी ज़रूरत इस क़दर है जान-ए-जाँ
ज़ीस्त के ख़ातिर ज़रूरी आब-ओ-दाना चाहिए

दिन ढले ही लौट आते हैं परिंदे शाख़ पर
हो गई अब रात तुझ को लौट आना चाहिए

अब थकन तक जा चुकी हैं हसरतें दीदार की
ख़ुश्क आँखों में 'सुमन' दरिया समाना चाहिए