उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kabhi kisi ko jo dekha kisi ki banhon mein

कभी किसी को जो देखा किसी की बाँहों में

کبھی کسی کو جو دیکھا کسی کی بانہوں میں

शायर: Zafar Ansari Zafar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कभी किसी को जो देखा किसी की बाँहों में
तुझी को याद किया दिल ने सर्द आहों में

इसी उमीद पे दुनिया को हम ने छोड़ दिया
सुकून दिल को मिलेगा तिरी पनाहों में

बहुत हसीन था बचपन का वो ज़माना भी
कोई हसीन कली थी मिरी निगाहों में

किया था तू ने भी मुझ से निबाह का वा'दा
ये चाँद और सितारे भी हैं गवाहों में

बहुत दिनों से छुपा है वो चाँद जाने कहाँ
बहुत दिनों से अंधेरा है दिल की राहों में

'अज़ाब-ए-हिज्र न दे ऐ ख़ुदा-ए-हुस्न मुझे
मिरी वफ़ा को भी शामिल न कर गुनाहों में