उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kabhi hone se kabhi dukh ke na hone se hua

कभी होने से कभी दुख के न होने से हुआ

کبھی ہونے سے کبھی دکھ کے نہ ہونے سے ہوا

शायर: R P Shokh4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कभी होने से कभी दुख के न होने से हुआ
ऐ मोहब्बत तुझे बस काम ही रोने से हुआ

ख़ुद ही लौट आए तो लौट आए मिरे दीदा-ए-तर
कोई ज़ंजीर कहाँ अश्क पिरोने से हुआ

वो तो रहता है कहीं दिल के अंधेरे में मगर
मुझ पे रौशन हुआ जो कुछ उसी कोने से हुआ

उस का मम्नून हूँ अब जिस ने भँवर में छोड़ा
इतना गहरा भी तो मैं उस के डुबोने से हुआ