उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kash ko likkha hai kasha shukriya

काश को लिक्खा है काशा शुक्रिया

کاش کو لکھا ہے کاشا شکریہ

शायर: Ejaaz tawakkal7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

काश को लिक्खा है काशा शुक्रिया
लफ़्ज़ को तुम ने तराशा शुक्रिया

आप की ख़्वाहिश तो पूरी हो गई
बन गया हूँ मैं तमाशा शुक्रिया

मेहरबानी मुझ पे तुम दोनों की थी
इस लिए आशा निराशा शुक्रिया

है ग़रज़ मुझ को फ़क़त आवाज़ से
आप बोलें जो भी भाषा शुक्रिया

तुम ने रक्खा है बहुत मेरा ख़याल
ऐ सबीना और नताशा शुक्रिया

बद-दुआएँ लफ़्ज़ की लेते नहीं
पाश को लिक्खो न पाशा शुक्रिया

मह-जबीनो अब इजाज़त दो मुझे
शुक्रिया और बे-तहाशा शुक्रिया