उर्दू शायरी · ग़ज़ल

karwan sust-musafir ko saza deta hai

कारवाँ सुस्त-मुसाफ़िर को सज़ा देता है

کارواں سست مسافر کو سزا دیتا ہے

शायर: Iffat Zarrin6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कारवाँ सुस्त-मुसाफ़िर को सज़ा देता है
ज़र्द पत्ते को हर इक पेड़ गिरा देता है

अपनी आँखों को वो बे-वज्ह सज़ा देता है
गीले ईंधन को अगर कोई हवा देता है

अब मिरे बस में कहाँ है कि मैं वापस आऊँ
मेरा माज़ी मुझे बेकार सदा देता है

किस लिए तू ने बुझा डाले सुलगते सपने
किस लिए अब इन्हें रह रह के हवा देता है

ज़िंदगी हम ने बनाई है 'अमल से लेकिन
हम भी कहते हैं ये ही सब को ख़ुदा देता है

एक बहता हुआ तिनका भी अहम है 'ज़र्रीं'
अपनी रफ़्तार से दरिया का पता देता है