उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kajal sham ki aankh se Dhalke aanchal tere shane se

काजल शाम की आँख से ढलके आँचल तेरे शाने से

کاجل شام کی آنکھ سے ڈھلکے آنچل تیرے شانے سے

शायर: M Kothiyavi Rahi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

काजल शाम की आँख से ढलके आँचल तेरे शाने से
और ज़रा ग़म भी ले आएँ यादों के वीराने से

क्या उस ने सोचा होगा जब ख़त मेरा पहुँचा होगा
सोच रहा हूँ देख आऊँ मैं जा कर किसी बहाने से

चाहत के दो बदन शहर में अलग अलग क्यों रहते हैं
टकराने की हिम्मत भी थी जब बे-दर्द ज़माने से

सोने चाँदी की दीवारें ढह देना आसान न था
लेकिन तुम तो बहक गए इस दुनिया के बहकाने से

उजड़ गई जब प्यार की महफ़िल चले गए सब दिल वाले
तन्हा राहे बहल रहा है माज़ी के अफ़्साने से