उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ab to ye soch ke bhi dil mera ghabraata hai

अब तो ये सोच के भी दिल मिरा घबराता है

اب تو یہ سوچ کے بھی دل مرا گھبراتا ہے

शायर: M Kothiyavi Rahi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अब तो ये सोच के भी दिल मिरा घबराता है
सुब्ह का भूला हुआ शाम को घर आता है

एक इक करके बुझे जाते हैं रख़्शंदा नुजूम
एक तू है जो ब-हर-सम्त नज़र आता है

अब तिरा ख़्वाब भी इक पैकर-ए-सीमीं की तरह
आसमानों से मिरे दिल में उतर आता है

लज़्ज़त-ए-संग की ख़ातिर ही बयाबाँ से कोई
छोड़ कर बाग़ सर-ए-राह गुज़र आता है

दिल की दहलीज़ से जाता है जो इक मरमरीं जिस्म
हर तरफ़ घूम के बा-दीदा-ए-तर आता है

जिस्म थक कर भी नहीं राह में रुकता पल भर
दिल मगर उस के शबिस्ताँ में ठहर आता है