उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dard ko dard se nisbat hogi

दर्द को दर्द से निस्बत होगी

درد کو درد سے نسبت ہوگی

शायर: M Kothiyavi Rahi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दर्द को दर्द से निस्बत होगी
क्यों सोचें कि मोहब्बत होगी

जान किसी को दी थी तुम ने
अब जो जिए तो नदामत होगी

तुम से मुझे कुछ काम नहीं है
तुम को मेरी ज़रूरत होगी

आओ ख़ुदा की बस्ती है ये
किसी खंडर में इबादत होगी

कुटियाओं का लुटेरा होगा
जिस की नई इमारत होगी

बैठा हूँ फिर दिया जलाए
परवानों की ज़ियाफ़त होगी

जिस्म किसी का गर्म नहीं है
'राही' तुम को हरारत होगी