उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ju-e-kam-ab se ek tez sa jharna hua main

जू-ए-कम-आब से इक तेज़ सा झरना हुआ मैं

جوئے کم آب سے اک تیز سا جھرنا ہوا میں

शायर: Rafiq Raaz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जू-ए-कम-आब से इक तेज़ सा झरना हुआ मैं
तेरी जानिब हूँ रवाँ शोर मचाता हुआ मैं

मुझ से ख़ाली नहीं अब एक भी ज़र्रा है यहाँ
देख ये तंग ज़मीं और ये फैला हुआ मैं

देख कर वुसअत-ए-सहरा-ए-तपाँ लर्ज़ां हूँ
साहिल-ए-दीदा-ए-नमनाक पे ठहरा हुआ मैं

पा-ब-ज़ंजीर इधर तेज़ हुआ और उधर
ख़ाक के तख़्त पे सुल्तान सा बैठा हुआ मैं

कोई ख़ुर्शीद सा दुनिया पे चमकता हुआ तू
किसी दीवार से साया सा निकलता हुआ मैं