उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo shajar be-libas rahte hain

जो शजर बे-लिबास रहते हैं

جو شجر بے لباس رہتے ہیں

शायर: Tahir Faraz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो शजर बे-लिबास रहते हैं
उन के साए उदास रहते हैं

चंद लम्हात की ख़ुशी के लिए
लोग बरसों उदास रहते हैं

इत्तिफ़ाक़न जो हँस लिए थे कभी
इंतिक़ामन उदास रहते हैं

मेरी पलकें हैं और अश्क तिरे
पेड़ दरिया के पास रहते हैं

उन के बारे में सोचिए 'ताहिर'
जो मुसलसल उदास रहते हैं