उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo sazishen thin jali bastiyan batati hain

जो साज़िशें थीं जली बस्तियाँ बताती हैं

جو سازشیں تھیں جلی بستیاں بتاتی ہیں

शायर: Nafas Ambalvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो साज़िशें थीं जली बस्तियाँ बताती हैं
ये दर्द वो हैं जो ख़ामोशियाँ बताती हैं

किसी ने झील के पानी में ज़हर घोल दिया
जो नीम-जाँ हैं अभी मछलियाँ बताती हैं

वो बद-हवास हैं कितनी चराग़ जलने से
इन आंधियों की ये बेचैनियाँ बताती हैं

कभी वो मिल की मशीनों में काम करता था
उस आदमी की कटी उँगलियाँ बताती हैं

हमारे साथ शरीक-ए-सफ़र हैं तूफ़ाँ भी
हमें तो रास्ता भी बिजलियाँ बताती हैं

तुम्हें भी कोई गिला तो ज़रूर है मुझ से
तुम्हारे लहजे की ये तल्ख़ियाँ बताती हैं

यहाँ मकीन हैं 'ओहदे घरों में लोग नहीं
दरों पे लटकी हुई तख़्तियाँ बताती हैं