उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo qissa-go ne sunaya wahi suna gaya hai

जो क़िस्सा-गो ने सुनाया वही सुना गया है

جو قصہ گو نے سنایا وہی سنا گیا ہے

शायर: Ejaz Gul6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो क़िस्सा-गो ने सुनाया वही सुना गया है
अगर था इस से सिवा तो नहीं कहा गया है

मुसाफ़िरत का हुनर है न वापसी की ख़बर
सो चल रहा हूँ जिधर भी ये रास्ता गया है

अमाँ को नील मयस्सर न मैं कोई मूसा
मुझे सुपुर्द-ए-फ़राईल कर दिया गया है

सबब नहीं था ज़मीं पर उतारने का मुझे
सबब बग़ैर ही वापस उठा लिया गया है

ये मुंतहा है मिरी ना-रसाई का शायद
जो दूर हद्द-ए-नज़र से परे ख़ला गया है

महक उठे हैं मिरे बाग़ के ख़स-ओ-ख़ाशाक
कोई टहलता हुआ सूरत-ए-सबा गया है