उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo gamzan hain unhin qafilon ke sath chalo

जो गामज़न हैं उन्हीं क़ाफ़िलों के साथ चलो

جو گامزن ہیں انہیں قافلوں کے ساتھ چلو

शायर: Nafas Ambalvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो गामज़न हैं उन्हीं क़ाफ़िलों के साथ चलो
ये मशवरा है मिरा तजरबों के साथ चलो

गुज़िश्ता दौर के माज़ी से कुछ सबक़ ले कर
नए सफ़र पे नए हौसलों के साथ चलो

तुम्हारे ज़ख़्म नहीं ये सफ़र की 'अज़्मत हैं
जो चल सको तो इन्हीं आबलों के साथ चलो

कहीं तुम्हारा तकब्बुर न तुम को ले डूबे
तो ख़ुद-शनास रहो आइनों के साथ चलो

तुम्हारे हाथ के पत्थर कहाँ कहाँ बरसे
ये देखना हो तो शीशा-गरों के साथ चलो

मुझे यक़ीन है अब भी पुराने लोगों पर
अभी भी वक़्त है उन फ़लसफ़ों के साथ चलो

सफ़र की सारी किताबें पलट के देखी हैं
कहाँ लिखा है 'नफ़स' जाहिलों के साथ चलो