उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo dil mera nahin mujhe us dil se kya gharaz

जो दिल मिरा नहीं मुझे उस दिल से क्या ग़रज़

جو دل مرا نہیں مجھے اس دل سے کیا غرض

शायर: Parveen Umm-e-Mushtaq7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो दिल मिरा नहीं मुझे उस दिल से क्या ग़रज़
चलनी न हो जो राह तो मंज़िल से क्या ग़रज़

डूबूँगा गर है मेरे मुक़द्दर में डूबना
ग़व्वास-ए-बहर-ए-इश्क़ को साहिल से क्या ग़रज़

वो दिल को देखता है न आमाल-ए-ज़ाहिरी
लैला के ख़्वास्त-गार को महमिल से क्या ग़रज़

सुनता है कौन आशिक़ों की आह-ओ-ज़ारियाँ
गोश-ए-चमन को शोर-ए-अनादिल से क्या ग़रज़

हम उस के शेफ़्ता हैं रक़ीबों से वास्ता
गुल से ग़रज़ है फ़ौज-ए-अनादिल से क्या ग़रज़

मरता हूँ और जा नहीं सकता सू-ए-अदम
मुझ ना-तवाँ को तौक़-ओ-सलासिल से क्या ग़रज़

क्यूँ दर-पय-ए-तलाश हैं अहबाब-ओ-अक़रबा
'परवीं' शहीद-ए-नाज़ को क़ातिल से क्या ग़रज़