उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo aane wale dinon ko gulab dekhna hai

जो आने वाले दिनों को गुलाब देखना है

جو آنے والے دنوں کو گلاب دیکھنا ہے

शायर: Obaidur Rahman7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो आने वाले दिनों को गुलाब देखना है
तो आओ तय ये करें अब से ख़्वाब देखना है

वो और होंगे जिन्हें इंतिख़ाब देखना है
हमें तो भाई फ़क़त इंतिसाब देखना है

हमारा सिर्फ़ हमारा बयान हो जिस में
किताब-ए-'इश्क़ में इक ऐसा बाब देखना है

हिसाब अपने गुनाहों का क्यों रखें जब कि
हमें तिरा करम-ए-बे-हिसाब देखना है

हवस ग़ुरूर रक़ाबत फ़साद बेचैनी
हमारे बच्चों को क्या क्या 'अज़ाब देखना है

जो साँस लीजे तो फ़रहत जो छोड़िए तो सुकूँ
वो दौर आएगा कब ये जनाब देखना है

नफ़स नफ़स में हो ख़ुशबू मोहब्बतों की 'उबैद'
तमाम 'उम्र यही एक ख़्वाब देखना है