उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jinhen uruj hamara giran guzarta hai

जिन्हें 'उरूज हमारा गिराँ गुज़रता है

جنہیں عروج ہمارا گراں گزرتا ہے

शायर: Aalam Nizami7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जिन्हें 'उरूज हमारा गिराँ गुज़रता है
सुकूँ से उन का कोई दिन कहाँ गुज़रता है

वो छोड़ जाता है फ़ित्नों के दरमियाँ हम को
हमारे शहर से जब भी फुलाँ गुज़रता है

मसर्रतों के ये मौसम भी इस तरह गुज़रे
किसी मकान से जैसे धुआँ गुज़रता है

अगर शरीक-ए-सफ़र हो मिज़ाज से वाक़िफ़
तो ज़िंदगी का सफ़र कामराँ गुज़रता है

भटकने वाले मुसाफ़िर की रहबरी के लिए
ग़ुबार उड़ाता हुआ कारवाँ गुज़रता है

जबीं पे सज्दे की हसरत मचलने लगती है
नमाज़ियों पे जो वक़्त-ए-अज़ाँ गुज़रता है

उसी की ज़ात पे करता है रश्क ये 'आलम'
जो छोड़ कर कोई दिलकश निशाँ गुज़रता है