उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ji chahta hai jina jazbaat ke mutabiq

जी चाहता है जीना जज़्बात के मुताबिक़

جی چاہتا ہے جینا جذبات کے مطابق

शायर: Iftikhar Raghib6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जी चाहता है जीना जज़्बात के मुताबिक़
हालात कर रहे हैं हालात के मुताबिक़

जिस दर्जा हिज्र-रुत में आँखें बरस रही हैं
ग़ज़लें भी उग रही हैं बरसात के मुताबिक़

सुख चैन और ख़ुशी का अंदाज़ा मत लगाओ
अस्बाब ओ माल-ओ-ज़र की बोहतात के मुताबिक़

हो शहर के मुताबिक़ हासिल हर इक सुहूलत
माहौल पर सुकूँ हो देहात के मुताबिक़

देखो ख़ुलूस-ए-निय्यत जज़्बात और मोहब्बत
मत चाहतों को तोलो सौग़ात के मुताबिक़

चादर ही के मुताबिक़ फैलाओ पाँव 'राग़िब'
मेआ'र-ए-ज़ीस्त रक्खा औक़ात के मुताबिक़