उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jidhar bhi dekhiye bas aasman hota tha

जिधर भी देखिए बस आसमान होता था

جدھر بھی دیکھیے بس آسمان ہوتا تھا

शायर: Vikram Sharma5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जिधर भी देखिए बस आसमान होता था
कहीं कहीं कोई ऊँचा मकान होता था

फिर एक रोज़ वो सब सानहे भी पेश आए
कि 'उम्र भर मुझे जिन का गुमान होता था

ज़रा सा वक़्त वो बूढ़े दरख़्त चाहते थे
मगर हमारा तो फूलों पे ध्यान होता था

यक़ीन जान मैं बेहतर हुआ हूँ पहले से
जो कम-सुख़न है अभी बे-ज़बान होता था

मैं फाँदता था किसी तौर शर्म की दीवार
अना का पर्दा मगर दरमियान होता था