उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jarahat-tohfa almas-armughan dagh-e-jigar hadiya

जराहत-तोहफ़ा अल्मास-अर्मुग़ाँ दाग़-ए-जिगर हदिया

جراحت تحفہ الماس ارمغاں داغ جگر ہدیہ (ردیف .. ا)

शायर: Mirza Ghalib6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जराहत-तोहफ़ा अल्मास-अर्मुग़ाँ दाग़-ए-जिगर हदिया
मुबारकबाद 'असद' ग़म-ख़्वार-ए-जान-ए-दर्दमंद आया

जुनूँ गर्म इंतिज़ार ओ नाला बेताबी कमंद आया
सुवैदा ता ब-लब ज़ंजीरी-ए-दूद-ए-सिपंद आया

मह-ए-अख़्तर-फ़शाँ की बहर इस्तिक़बाल आँखों से
तमाशा किश्वर-ए-आईना में आईना-बंद आया

तग़ाफ़ुल बद-गुमानी बल्कि मेरी सख़्त-जानी से
निगाह-ए-बे-हिजाब-ए-नाज़ को बीम-ए-गज़ंद आया

फ़ज़ा-ए-ख़ंदा-ए-गुल तंग ओ ज़ौक़-ए-ऐश बे-परवा
फ़राग़त-गाह-ए-आग़ोश-ए-विदा'-ए-दिल-पसंद आया

अदम है ख़ैर-ख़्वाह-ए-जल्वा को ज़िंदान-ए-बेताबी
ख़िराम-ए-नाज़ बर्क़-ए-ख़िरमन-ए-सई-ए-सिपंद आया