उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jahan dekho wahan par aadmi hai

जहाँ देखो वहाँ पर आदमी है

جہاں دیکھو وہاں پر آدمی ہے

शायर: Vinay Shukla Mangal3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जहाँ देखो वहाँ पर आदमी है
हर इक इंसाँ के अंदर आदमी है

कभी खाई है ठोकर राह चलते
कि बनता खा के ठोकर आदमी है

'विनय' हम कौन सी दुनिया में आए
कई चेहरे लिए हर आदमी है