उर्दू शायरी · ग़ज़ल

gham ko dil se laga ke dekha hai

ग़म को दिल से लगा के देखा है

غم کو دل سے لگا کے دیکھا ہے

शायर: Vinay Shukla Mangal4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़म को दिल से लगा के देखा है
फिर तुम्हें गुनगुना के देखा है

मौत को ही क़रीब पाया है
जब भी तुम को भुला के देखा है

मेरे अपने ही बन गए दुश्मन
वक़्त को आज़मा के देखा है

हम को बे-मौत ही न आए मौत
रस्म-ए-उल्फ़त निभा के देखा है